Karwa Chauth Kaise Manate Hai | Karwa Chauth Vrat Vidhi

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रविवार को करवाचौथ हैं, करवा चौथ के दिन सभी सुहागन पत्नी अपने पति के लिए व्रत रखती हैं. हिन्दू calendra में ये व्रत कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थी को मानते है. इस दिन का व्रत सभी सुहागन पत्नी अपने पति के लिए व्रत रखती हैं जिससे उनकी उम्र लम्बी हों. लम्बी उम्र के लिए करवाचौथ के दिन महिलाये उपवाश करती हैं और रात को चाँद देख कर अपना व्रत तोरती हैं. लेकिन इस कुछ महिलाये गलत काम कर देती हैं जिससे अपसगुन होता हैं. आज के इस लेख में आप जानेंगे करवाचौथ व्रत का विधि, Karwa Chauth Kaise Manate Hai, करवा चौथ का शुभ मुहूर्त, इस दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए जानिए.

Karwa Chauth Kaise Manate Ha

Karwa Chauth का शुभ मुहर्त कब हैं

यह व्रत हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को होता हैं. इस साल करवा चौथ का व्रत 8 अक्टूबर 2017 रविवार को हैं. सिर्फ शादी शुदा महिलाये ये व्रत कर सकती है लेकिन आज के ज़माने में कुवारी महिलाये भी ये व्रत अपने होने वाले पति के लिए करती हैं. महिलाये अपने सास और माँ से Karwa Chauth Vrat Vidhi जानती है लेकिन जो घर से दूर रहती हैं वो इस लेख को पढ़ कर व्रत करने का तरीका जान सकती हैं.

आठ अक्तूबर को शाम 4.58 मिनट से नौ अक्तूबर को मध्याह्न 2.16 मिनट तक चाँद देख सकती हैं. पूजा का मुहूर्त शाम 5.54 मिनट से शाम 7.10 मिनट तक शुभ रहेगा.

Karwa Chauth Vrat Vidhi

करवा चौथ का व्रत विधि जाने:

  • सूर्योदय से पहले स्नान जरुर करे और व्रत करने का संकल्प करे. सास के द्वारा दी गयी सरगी (मिठाई, फल, सेंवई, पूड़ी और साज-श्रंगार) खाए.
  • सरगी में प्याज़ और लहसुन से बना खाना नहीं खाए.
  • सरगी करने के बाद बिना पानी पिए और कुछ खाए व्रत शुरू हो जायेगा. अब आपको पुरे दिन भगवन शंकर और पारवती को मन में रखकर उनको ध्यान रखे.
  • दीवार पर करवा धरना करना होगा, इसमें दीवार पर गेरू से फलक बना कर करवा बनाना होगा.
  • आठ पुरियो की अठवारी और हलुआ बनाना चाहिए.
  • शाम को माँ गौरी और गणेश की पूजा करे.
  • इस मंत्र का उचारण करे – ‘नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्‌। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥’ अलग-अलग छेत्र में अलग तरीका से करवा चौथ मानते है हो सकता है आपके पूर्वजो की परम्परा अलग हो.
  • अब करवा चौथ की कथा सुने और उसके बाद घर के सभी बरे बुजुर्ग के पैर छुय. कथा सुनने के लिए गेहूं अथवा चावल के 13 दानें हाथ में जरुर रखे.
  • रात में छननी का प्रयोग करके चाँद देखे और उन्हें अर्ध्य प्रदान करे. फिर पति के पैर छुए और उनका आशीर्वाद ले. इसके बाद उन्हें प्रसाद दे और भोजन करवाए फिर खुद भी भोजन करे.



करवा चौथ कथा

बहुत समय पहले इन्द्रप्रस्थपुर के एक शहर में वेदशर्मा नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वेदशर्मा का विवाह लीलावती से हुआ था जिससे उसके सात महान पुत्र और वीरावती नाम की एक गुणवान पुत्री थी। क्योंकि सात भाईयों की वह केवल एक अकेली बहन थी जिसके कारण वह अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने भाईयों की भी लाड़ली थी।

जब वह विवाह के लायक हो गयी तब उसकी शादी एक उचित ब्राह्मण युवक से हुई। शादी के बाद वीरावती जब अपने माता-पिता के यहाँ थी तब उसने अपनी भाभियों के साथ पति की लम्बी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा। करवा चौथ के व्रत के दौरान वीरावती को भूख सहन नहीं हुई और कमजोरी के कारण वह मूर्छित होकर जमीन पर गिर गई।

सभी भाईयों से उनकी प्यारी बहन की दयनीय स्थिति सहन नहीं हो पा रही थी। वे जानते थे वीरावती जो कि एक पतिव्रता नारी है चन्द्रमा के दर्शन किये बिना भोजन ग्रहण नहीं करेगी चाहे उसके प्राण ही क्यों ना निकल जायें। सभी भाईयों ने मिलकर एक योजना बनाई जिससे उनकी बहन भोजन ग्रहण कर ले। उनमें से एक भाई कुछ दूर वट के वृक्ष पर हाथ में छलनी और दीपक लेकर चढ़ गया। जब वीरावती मूर्छित अवस्था से जागी तो उसके बाकी सभी भाईयों ने उससे कहा कि चन्द्रोदय हो गया है और उसे छत पर चन्द्रमा के दर्शन कराने ले आये। वीरावती ने कुछ दूर वट के वृक्ष पर छलनी के पीछे दीपक को देख विश्वास कर लिया कि चन्द्रमा वृक्ष के पीछे निकल आया है। अपनी भूख से व्याकुल वीरावती ने शीघ्र ही दीपक को चन्द्रमा समझ अर्घ अर्पण कर अपने व्रत को तोड़ा। वीरावती ने जब भोजन करना प्रारम्भ किया तो उसे अशुभ संकेत मिलने लगे। पहले कौर में उसे बाल मिला, दुसरें में उसे छींक आई और तीसरे कौर में उसे अपने ससुराल वालों से निमंत्रण मिला। पहली बार अपने ससुराल पहुँचने के बाद उसने अपने पति के मृत शरीर को पाया।

अपने पति के मृत शरीर को देखकर वीरावती रोने लगी और करवा चौथ के व्रत के दौरान अपनी किसी भूल के लिए खुद को दोषी ठहराने लगी। वह विलाप करने लगी। उसका विलाप सुनकर देवी इन्द्राणी जो कि इन्द्र देवता की पत्नी है, वीरावती को सान्त्वना देने के लिए पहुँची।

वीरावती ने देवी इन्द्राणी से पूछा कि करवा चौथ के दिन ही उसके पति की मृत्यु क्यों हुई और अपने पति को जीवित करने की वह देवी इन्द्राणी से विनती करने लगी। वीरावती का दुःख देखकर देवी इन्द्राणी ने उससे कहा कि उसने चन्द्रमा को अर्घ अर्पण किये बिना ही व्रत को तोड़ा था जिसके कारण उसके पति की असामयिक मृत्यु हो गई। देवी इन्द्राणी ने वीरावती को करवा चौथ के व्रत के साथ-साथ पूरे साल में हर माह की चौथ को व्रत करने की सलाह दी और उसे आश्वासित किया कि ऐसा करने से उसका पति जीवित लौट आएगा।

इसके बाद वीरावती सभी धार्मिक कृत्यों और मासिक उपवास को पूरे विश्वास के साथ करती। अन्त में उन सभी व्रतों से मिले पुण्य के कारण वीरावती को उसका पति पुनः प्राप्त हो गया।



Karva Chauth Par Kya Nahi Kare

  • किसी भी सुहागन महिला को बुरा भला नहीं करे और उन्हें श्राप देने की गलती नहीं करे.
  • चूड़ी, लहठी, ब‌िंदी, स‌िंदूर को कचड़े में फेकने की गलती नहीं करे.
  • इस दिन अपने पति के अलावा और किसी पुरुष के बारे में नहीं सोचना चाहिए.
  • आज के दिन स‌िलाई, कटाई, बुनाई के ल‌िए कैंची, सुई, चाकू का उपयोग नहीं करना चाहिए.

आज आपने जाना Karwa Chauth Kaise Manate Hai, कथा, व्रत करने का तरीका और इस दिन क्या नहीं करना चाहिए. इस लेख को शेयर करके और लोगो को भी करवा चौथ के बारे में बताये. Facebook, twitter पर शेयर जरुर करे.

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