Muharram 2018: WhatsApp Status, Hindi Shayari, Quotes, SMS, Facebook Post, Image

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मुस्लिम धर्म में Shia और Sunni के लिए मुहर्रम बहुत महतवपूर्ण त्योहार हैं. ये त्योहार Monday, September 10 को है और मुस्लिम के लिए ये उदासी का दिन हैं, मुहर्रम का मतलब हैं मना किया हुआ या पापी. बहुत से लोग पूछते हैं “मुस्लिम मुहर्रम क्यों मनाते हैं?” 680 AD में इराक के कर्बला युद्ध में कलिफा यज़ीद ने युद्ध में इमाम हुस्सेन को मरवा दिया था. उनके मृत्यु के बाद मुस्लिम धर्म 2 भाग में हो गया. शिया मुस्लिम इस दिन को अलग तरीके से मनाते है वो Hussein Ibn Ali की क़ुरबानी की आदर करते है और इसे क़ुरबानी का दिन मानते हैं, जबकि सुन्नी इसे उदासी का दिन मानते हैं. Aap Chahae to Republic Day 2018 Hindi Shayari bhi padh sakte hai.

Muharram 2018 Whatsapp Status, Facebook Message, Quotes, Shayari in Hindi

फिर आज हक के लिए जान फ़िदा करे,
वफ़ा भी झूम उठे, यूँ वफ़ा करे कोई नमाज़,
1400 सालो से इंतज़ार में हैं, हुस्सेन की तरह मुझे आदा करे कोई.

आँखों को कोई खवाब तो दिखाई दे,
ताबीर में इमाम का जलवा दिखाई दे,
ऐ Ibn-E-Murtuza तेरे सामने सूरज भी एक छोटा सा ज़रा दिखाई दे.



जन्नत की आरजू में कहा जा रहा हैं लोग,
जन्नत तो कर्बला में हुस्सेन ने दिया,
जो रहना हो चैन से तो अली से सीखो, मरना हुस्सेन से.

करबला का गम हर घर में मनाया जायेगा,
Maqsad-E-Shabeer को बताया जायेगा,
याद करके जो न रोये,
कर्बला का प्यास कबर से,
तिस्ना औ महशर में उठाया जायेगा.

सलाम इ हुस्सेन अपनी तक़दीर जागते है तेरे मातम से,
खून की रह बेचते है तेरे मातम से,
अपने izhar-e-aqeedat का सलीका ये हैं,
हम नया साल मनाते है तेरे मातम से.

हुस्सेन की नमाज़ हैं Jabeen-E-Ibn-E-Ali की नियाज़ जारी हैं, खुदा के दिन की Umr-E-Daraz हैं.
सजदे में रख के सर को न उठाया हुस्सेन ने मेरे,
हुस्सेन की नमाज़ अब तक जारी हैं.

पानी का तालाब हो तो एक काम किया कर,
कर्बला के नाम पर एक जाम पिया कर,
की मुझको “Hussain IBN-E-ALI” ने ये नशिहत,
ज़ालिम हो मुकाबिल तो मान लिया कर.

जरुरत थी न तलवार की और किसी हथियार की,
सिर्फ एक दुआ थी करबाला में अलमदार की फ़क़त मिल जाये.




करीब अल्लाह के आओ तो बात बने,
ईमान फिर से जगाओ तो बात बने,
लहू जो बह गया कर्बला में,
उनके मकसद को समझो तो कोई बात बने.

जब भी कभी ज़म्मिर का सौदा हो दोस्तों तो इंकार करो हुस्सेन की क़ुरबानी की तरह.

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